Tipu Sultan History in Hindi टीपू सुल्तान का इतिहास

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Tipu Sultan History in Hindi टीपू सुल्तान का इतिहास

टीपू सुल्तान का इतिहास एवं कहानी

टीपू सुल्तान का जन्म 10 दिसंबर 1750 को देवनहल्ली में हुआ था। हैदर अली के सबसे बड़े पुत्र होने के नाते, टीपू सुल्तान अपने पिता के बाद राज सिंहासन पर आसीन हुए| वह भारत में मैसूर के स्वतंत्र राज्य के शासक थे। टीपू सुल्तान बचपन में बहुत कुशाग्र बुद्धि के थे और वह सैन्य कला में निपुण थे| उन्होंने कई लड़ाइयों में अपने पिता की सहायता की थी| टीपू को किताबों से बहुत लगाव था और उसके पुस्तकालय में लगभग 2000 किताबें थी| जब टीपू सुल्तान की उम्र 32 वर्ष की थी तब उसके पिता हैदर अली की मृत्यु हो गई| हैदर अली की मृत्यु 7 दिसंबर 1782 ईसवी को चित्तूर में कैंसर से हुई थी| राज सिंहासन पर आसीन होने के बाद टीपू सुल्तान ने जनता की भलाई के लिए बहुत सारे सराहनीय कार्य किए और वह अपने राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध था| जब टीपू गद्दी पर आसीन हुआ तब अंग्रेजों का प्रभुत्व भारत में स्थापित था और टीपू के पिता के साथ अंग्रेजों के मतभेद थे| इन्हीं मतभेदों के कारण अंग्रेजो के खिलाफ उन्होंने कई संघर्ष किए थे| अंग्रेजों ने टीपू के खिलाफ कई संघर्ष किए परंतु वह बड़े ही पराक्रम से अंग्रेजों का सामना करता था और अंग्रेज टीपू सुल्तान के खिलाफ सफल नहीं हो पा रहे थे| अपनी असफलताओं के कारण अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान के खिलाफ षड्यंत्र का सहारा लिया| अंग्रेजों ने कई प्रकार के षड्यंत्र रच कर टीपू सुल्तान के विश्वासपात्रों को अपनी ओर मिला लिया| टीपू सुल्तान को हराने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने फ्रांसीसी लोगों, अफगानी एवं तुर्की अमीरों, मराठा और हैदराबाद के निजाम को अपनी ओर मिला| इस कारणवश टीपू सुल्तान की हार हो गई|

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