सुमेरिया की सभ्यता

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सुमेरिया की सभ्यता

सुमेरिया की सभ्यता-

मेसोपोटामिया की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है| मेसोपोटामिया में सर्वप्रथम सुमेरिया की सभ्यता का ही विकास हुआ था| यद्यपि विद्वानों में सुमेरिया सभ्यता के लोगों के मूल निवास स्थान के विषय में मतभेद है परंतु अनेक इतिहासकारों का यह मानना है कि मेसोपोटामिया के निवासी उस क्षेत्र के निवासी थे जहां पर दजला एवं फरात नदियां पेलेस्टाइन में जॉर्डन नदी की घाटी में मिलती है| दजला एवं फरात नदियों के इस क्षेत्र को बहुत अधिक उपजाऊ होने के कारण उपजाऊ क्रिसेंट के नाम से पुकारा जाता है| सुमेरिया के निवासियों ने अपनी राजधानी सुमेर बनाई, और इसी राजधानी के कारण इस सभ्यता को सुमेरिया की सभ्यता के नाम से जाना जाता है|

सुमेरिया की सभ्यता की राजनीति स्थिति-

सुमेरिया की सभ्यता का क्षेत्र दजला एवं फरात नदियों का चित्र था और जिस कारणवश इस क्षेत्र में कई द्वीप बन गए थे| नदियों के कारण इस क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्धता और नदियों के आसपास बने दीपों पर धीरे-धीरे सभ्यताओं का विकास प्रारंभ हुआ| कालांतर में प्रत्येक दीप पर एक राज्य की स्थापना हुई| सुमेरिया सभ्यता के प्रमुख राज्य- किश, उर, इरिदु, निष्पुर आदि थे | प्रारंभ में किन राज्यों में सत्ता के लिए संघर्ष हुआ करता था किंतु कालांतर में लगभग सभी क्षेत्र आपस में मिल गए और सुमेर नगर की अधीनता को स्वीकार कर लिया| राज्यों के आपस में मिल जाने के कारण इनकी शक्ति में बहुत अधिक वृद्धि हुई और इन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार भी किया| सुमेरिया की सभ्यता में शासन धर्म पर आधारित हुआ करता था और इस सभ्यता में राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि समझा जाता था| इतिहासकारों के मतानुसार सुमेरिया की सभ्यता का संस्थापक सारगन प्रथम था|

सुमेरिया की सभ्यता का सामाजिक जीवन-

सुमेरिया सभ्यता के समाज पर धर्म का विशेष प्रभाव था और लोग धर्म कर्म में विश्वास करते थे| तत्कालीन समाज में लोग ईश्वर में आस्था रखते थे, और उस समय का समाज तीन भागों में विभाजित था- उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग|
उच्च वर्ग के अंतर्गत शासक, सामंत, पुरोहित व राज्य के उच्च अधिकारी आदि हुआ करते थे जबकि मध्यम वर्ग में किसान, शिल्पकार, व्यापारी आदि लोग आते थे| निम्न वर्ग में दास वर्ग के लोग सम्मिलित थे|

सुमेरिया की सभ्यता का आर्थिक जीवन-

सुमेरिया सभ्यता के जनमानस का मुख्य व्यवसाय कृषि था और इस सभ्यता के लोग मुख्यता कृषि पर ही आश्रित थे| कृषि कार्यों के लिए लोगों ने नहरों एवं बांधों का निर्माण करवाया, जिससे जल को उचित रूप से कार्य में लिया जा सके| इसी कारणवश इस सभ्यता में कृषि का विकास हुआ| सुमेरिया की सभ्यता में लोग दूरदराज के क्षेत्रों में व्यापार के लिए जाया करते थे और तत्कालीन समाज में व्यापार की स्थिति भी बहुत अच्छी थी| ऐसा माना जाता है कि इस सभ्यता के लोग चाकू का प्रयोग करते थे|

धार्मिक जीवन-

इस सभ्यता के लोगों में धर्म के प्रति विशेष महत्व था| शुरुआत में इस सभ्यता के लोग केवल एक ही देवता की पूजा किया करते थे परंतु बाद में अनेक देवी एवं देवताओं की पूजा की जाने लगी| लोग अनेकों प्रकार से अपने अपने देवी-देवताओं की पूजा इस सभ्यता में करते थे|

Sumeria ki sabhyata

लेखन कला-

इतिहासकारों के मतानुसार सुमेरिया की सभ्यता में लोगों को लेखन कला का ज्ञान था| सुमेरिया की सभ्यता की लिपि को कीलाकार लिपि कहा जाता है|

विज्ञान-

सुमेरिया के लोग विज्ञान क्षेत्र में बहुत विकसित थे |सुमेरिया के लोग नंबरों के स्थान पर चिन्हों का प्रयोग करते थे| जिस प्रकार वर्तमान समय में 10 की इकाई दशमलव प्रणाली का प्रयोग किया जाता है उसी तरह सुमेरिया की सभ्यता में 10 के स्थान पर 60 पर आधारित प्रणाली का प्रयोग किया जाता था| 60 पर आधारित इस प्रणाली को षटदाशमिक कहा जाता था|

कला-

विज्ञान और लेखन कला के अतिरिक्त सुमैया के निवासियों ने स्थापत्य कला के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति की थी| इस सभ्यता के लोगों ने मेहराब, गुंबद और स्तंभ बनाने की कला का ज्ञान विश्व को प्रदान किया, जिसका उपयोग वर्तमान समय में भी किया जा रहा है| इस सभ्यता के लोग उच्च कोटि के भवन निर्माता भी थे|

सुमेरिया की सभ्यता ने मानव सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था| इस सभ्यता ने मानव को काफी कुछ दिया जिस कारणवश इस सभ्यता को समकालीन सभ्यताओं में श्रेष्ठ स्थान दिया जा सकता है|

यह भी जाने —
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