पेशवा बाजीराव एवं बालाजी विश्वनाथ

  • 0

पेशवा बाजीराव एवं बालाजी विश्वनाथ

पेशवा बालाजी विश्वनाथ-

(सन 1713 ईस्वी से 1720 ईस्वी तक)

शाहू बड़ा ही विलास प्रिय था एवं उसने शासन का भार अपने योग्य मंत्री बालाजी विश्वनाथ के हाथों में सौंप दिया था, शाहू को लोग मुगलों का एक सामंत समझते थे किंतु बालाजी विश्वनाथ ने मराठों को मुगलों के चंगुल से पूरी तरह से मुक्त कर दिया| उसने कृषि को प्रोत्साहन दिया एवं ठेकेदारी प्रथा को बंद कर दिया| सन 1717 ईसवी में सय्यद भाई हुसेन अली से संधि की जिसके अनुसार दक्षिण में चौथ और सरदेशमुखी वसूल करने का अधिकार उसे प्राप्त हुआ|

बाजीराव प्रथम-

(सन 1720 से 1740 ईसवी)

बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा हुआ| वह बड़ा ही योग्य एवं प्रतिभाशाली पुरुष था| युवावस्था से ही उसने नवीन विजय की योजनाएं बना ली थी| सन 1724 ईसवी में उस ने मालवा पर चढ़ाई की एवं उसे अपने अधिकार में कर लिया| 4 वर्ष के बाद उसने निज़ाम से चौथ वसूल की इसके बाद गुजरात, बुंदेलखंड एवं बरार की बारी आई| सन 1730 ईसवी में बाजीराव अपनी सेना के साथ दिल्ली पहुंचा| बादशाह ने निजाम उल मुल्क को अपनी सहायता के लिए बुलाया परंतु भोपाल के निकट वह पराजित हुआ| दोनों दलों में संधि हुई जिसके अनुसार मालवा एवं नर्वदा तथा चंबल के बीच की भूमि पर मराठों के अधिकार को बादशाह ने मान लिया| इसके अतिरिक्त बादशाह ने 50 लाख रुपए युद्ध खर्च के रूप में दिया| 1730 ईसवी में पुर्तगालियों को हराकर बेसिन के किले पर अधिकार कर लिया| अपने जीवन के अंतिम दिनों में पेशवा ने मुगल सूबों को मराठा सरदारों के प्रभाव क्षेत्र में विभाजित कर दिया| ये मुख्य मराठा सरदार गायकवाड, सिंधिया, भोंसले एवं होल्कर थे जिन्होंने बाद में स्वतंत्र राज्यों की स्थापना की|

peshwa bajirao in hindi

बालाजी बाजीराव-

(सन 1740 1761 तक)

बाजीराव की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव पेशवा हुआ| इस नए पेसवा ने भी उत्तर में मराठों की प्रसार नीति को जारी रखा, साथ ही साथ दक्षिण में उनकी शक्ति को संगठित करने का भी प्रयास किया| अब राघोजी भोसले एवं भास्कर पंडित के सेनापतित्व में मराठों ने उड़ीसा को लूट लिया एवं बंगाल के सूबेदार अलीवर्दी खान को पराजित कर दिया| अंत में अलीवर्दी खान से संधि हुई जिसके अनुसार उसने राघोजी को 12 लाख वार्षिक चौथ के रूप में दिया| इसके बदले में राघोजी ने बंगाल पर भविष्य में फिर से आक्रमण ना करने का वचन दिया|

सन 1748 में शाहू की मृत्यु हो गई इसी समय सम्राट मोहम्मद साह की भी मृत्यु हो गई सभी दलों के नेता दिल्ली में अपनी शक्ति स्थापित करने का प्रयास करने लगे| वजीर सफदरजंग ने सिंधिया एवं होल्कर से रुहेलों के विरुद्ध लड़ने के लिए सहायता मांगी जब सफदरजंग वजीर के स्थान से हटा दिया गया तब मराठों ने उसके प्रतिद्वंदी को सहायता पहुंचाकर दिल्ली में अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया,इसके बाद सन 1759 में मराठों ने उदयगिरि नामक स्थान में निजाम को युद्ध में पराजित किया, दोनों दलों में संधि हो गई, इस संधि के अनुसार मराठों को असीरगढ़, दौलताबाद, बीजापुर, अहमदनगर एवं बुरहानपुर के किले तथा कुछ जमीन मिली| सन 1760 तक मराठों की शक्ति अपनी चरम पर पहुंच गई, उन्होंने संपूर्ण भारत से चौथ वसूल की और उनका अधिकार चंबल से लेकर गोदावरी तक तथा अरब सागर से बंगाल की खाड़ी के मध्य तक फैल गया|

Share this with your friends--

Leave a Reply