परमार वंश का इतिहास Parmar Vansh History in Hindi

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परमार वंश का इतिहास Parmar Vansh History in Hindi

उत्तर भारत में हर्षोत्तर काल में अपने सत्य स्थापित करने वालों ने परमार जी प्रमुख हैं| परमार वंश पूर्व मध्यकालीन भारतीय इतिहास का एक प्रमुख राजपूत राजवंश था| इस वंश ने 9 वीं से 11 वीं शताब्दी तक शासन कार्य किया| राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से परमार वंश का इतिहास बड़ा ही महत्वपूर्ण माना जाता है| परमारों की उत्पत्ति अग्निकुल से मानी गई है और कुछ इतिहासकार इन्हें राष्ट्रकूटों का वंशज भी मानते हैं|
Parmar Vansh ka itihas in Hindi-

परमार वंश की उत्पत्ति-

10वी शताब्दी के प्रारंभ में प्रतिहार वंश के शासकों का आधिपत्य लगभग समाप्त हो चुका था और एक नए वंश का उदय हुआ था जिसका नाम था परमार वंश| परमार वंश का प्रथम शासक श्रीहर्ष था| परमारों की प्रारंभिक राजधानी उज्जैन थी परंतु बाद में परमार वंश के शासकों ने धरा को अपनी राजधानी बनाया| परमार वंश का प्रारंभिक इतिहास ज्ञात करने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्रोत उदयपुर प्रशस्ति है| परमार राजाओं की शक्ति का उत्कर्ष वाक्पति मुंज के समय में हुआ था| वाक्पति मुंज परमार वंश के शासकों में सबसे अधिक शक्तिशाली था उसने त्रिपुरी के कलचुरी तथा चालुक्य नरेश तैलप द्वितीय को पराजित किया था| वाक्पति मुंज के पश्चात परमार साम्राज्य पर सिंधुराज का शासन हुआ| पद्म गुप्त वाक्पति मुंज व सिंधु राज का दरबारी कवि था|

परमार वंश का संस्थापक-

परमार एक राजवंश का नाम है और इस युद्ध के महान कवि पद्मगुप्त ने अपनी पुस्तक ‘नवसाहसांकचरित‘ में एक कथा का वर्णन किया है। इस वर्णन के अनुसार ऋषि वशिष्ठ ने ऋषि विश्वामित्र के विरुद्ध युद्ध में सहायता प्राप्त करने के लिये अग्निकुंड से एक वीर पुरुष का निर्माण किया था और इस वीर पुरुष का नाम परमार रखा गया| यही पुरुष परमार वंश का संस्थापक माना जाता है और उसी के नाम पर इस वंश का नाम पड़ा| परंतु कुछ विद्वान परमार वंश के संस्थापक के संबंध में अलग-अलग मत प्रस्तुत करते हैं|

परमार वंश के शासक-

परमार वंश के शासकों के नाम-

  • उपेन्द्र
  • वैरीसिंह प्रथम
  • सियक प्रथम
  • वाकपति
  • वैरीसिंह द्वितीय
  • सियक द्वितीय
  • वाकपतिराज
  • सिंधुराज
  • भोज प्रथम
  • जयसिंह प्रथम
  • उदयादित्य
  • लक्ष्मणदेव
  • नरवर्मन
  • यशोवर्मन
  • जयवर्मन प्रथम
  • विंध्यवर्मन
  • सुभातवर्मन
  • अर्जुनवर्मन प्रथम  
  • देवपाल
  • जयतुगीदेव
  • जयवर्मन द्वितीय
  • जयसिंह द्वितीय
  • अर्जुनवर्मन द्वितीय
  • भोज द्वितीय
  • महालकदेव
  • संजीव सिंह परमार

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परमार वंश का अंत-

भोज परमार के बाद परमार साम्राज्य में कोई भी प्रतापी शासक पैसा नहीं था जो परमार वंश के पतन को रोक पाता| भोज परमार के बादशाह कौन है परमार साम्राज्य की राजगद्दी को संभाला परंतु उनके समय में परमार वंश का पतन होता चला गया|

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परमार वंश की शासन व्यवस्था-

परमार साम्राज्य का शासन क्षेत्र कई मंडलों में बटा हुआ था इसके अतिरिक्त प्रत्येक मंडलों को भागों में विभाजित किया गया है| सेनापति दण्डाधीश कहलाता था| सेना में अश्वारोही एवं हाथी होते थे|बिहार का सर्वोच्च अधिकारी राजा होता था और इस साम्राज्य का दंड विधान बहुत ही कठोर था| इस साम्राज्य की वित्तीय व्यवस्था बहुत ही सुसंगठित थी| राज्य की ओर से कई प्रकार के कर (tax) लिए जाते थे| कर को शुल्क या चुंगी के नाम से भी जाना जाता था|

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