Muhammad Bin Tughlaq History and Biography in Hindi

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Muhammad Bin Tughlaq History and Biography in Hindi

मोहम्मद बिन तुग़लक़ गयासुद्दीन तुग़लक़ का पुत्र था और वह 1325 ईस्वी में तुगलक राजवंश के सिंहासन पर विराजमान हुआ| उसने 1325 ईस्वी से 1351 ईस्वी तक दिल्ली की सल्तनत पर शासन किया। वह भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद शासकों में से एक था इसका प्रमुख कारण यह था की उसने कई प्रशासनिक सुधार किए, लेकिन योजना और निर्णय की कमी के कारण उनमें से ज्यादातर विफल रहे। भारतीय इतिहास में, तुग़लक़ को बुद्धिमान मूर्ख राजा कहा जाता है। बिन तुगलक अपने समय के सबसे उल्लेखनीय शासकों में से एक था इसके साथ ही साथ वह बहुत ही शिक्षित एवं जानकार व्यक्ति था| उसे फ़ारसी, अरबी, तुर्की और संस्कृत जैसी कई अन्य भाषाओं का ज्ञान था| वह धार्मिक मामलों में बहुत सहिष्णु था और हिंदुओं के साथ उदार था| उसने मिस्र, चीन और ईरान जैसे दूर देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किया। इसके साथ ही साथ उसने कई उदार और लाभकारी सुधारों को भी पेश किया लेकिन दुर्भाग्यवश उसके सभी सुधार विफल रहे।

Biography Of Muhammad Bin Tughlaq in Hindi

  • जन्म: 1300, मुल्तान, पाकिस्तान
  • मृत्यु : 20 मार्च 1351, थट्टा, पाकिस्तान
  • दफनः तुगलाकाबाद किला, नई दिल्ली
  • पिता: गयासुद्दीन तुग़लक़
  • उत्तराधिकारी: फ़िरोज़ शाह तुगलक
  • वंश: तुगलक वंश

1327 ईस्वी में, तुग़लक़ ने अपनी राजधानी दिल्ली से स्थानांतरित की और महाराष्ट्र के केंद्र में स्थित देवगिरी को अपनी राजधानी बनाया, बाद में देवगिरि का नाम बदलकर दौलताबाद रखा गया। उसके पास राजधानी को बदलने के कई कारण थे जैसे की अपने राज्य को मंगोल आक्रमणकारियों से बचाना तथा दक्कन की समृद्ध एवं उपजाऊ भूमि पर अपना नियंत्रण करना, इसके साथ ही साथ वह गुजरात और कोरोमंडल तट पर स्थित कई बंदरगाहों को अपने नियंत्रण में लेना चाहता था| लेकिन इन योजनाओं में से अधिकतर योजनाएं तग़लक़ की अधीरता और फैसले की कमी के कारण विफल हो गयी|

Muhammad Bin Tughlaq History and Biography in Hindi

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गंगा और यमुना के बीच का दोआब का क्षेत्र बहुत उपजाऊ था और वहां का उत्पादन देश के किसी भी दूसरे हिस्से से ज्यादा था, इसी कारण वश मुहमम्मद बिन तुग़लक़ ने इस क्षेत्र के कर (Tax) में बढ़ोत्तरी कर दी लेकिन टैक्स में बढ़ोतरी एक गलत समय पर हुई जिस वजह से किसानों में काफी असंतोष पैदा हुआ| कृषि में सुधार लाने के लिए, मुहम्मद-बिन-तुगलक ने कई उपायों का निर्णय लिया और उसने दीवान-ए-कोही नामक एक कृषि विभाग की स्थापना की। इस विभाग का मुख्य काम अनावश्यक भूमि का पता लगाना था और वहां खेती के लिए सभी तरह की व्यवस्था करना था। जोकि तुग़लक़ के द्वारा किया गया एक सराहनीय प्रयास था|

टोकन मुद्रा का सर्वप्रतम सञ्चालन सुल्तान मुहम्मद-बिन-तुगलक ने ही किया था और यह उसके द्वारा लिए गए साहसिक निर्णयों में से एक था| तुगलक के पूर्ववर्ती शासक सोने और चांदी के सिक्कों पर निर्भर थे, लेकिन मुहम्मद-बिन-तुगलक के शासन के दौरान विभिन्न लेनदेन के लिए सिक्कों की एक बड़ी मात्रा की आवश्यकता थी और देश में सोने और चांदी के सिक्कों की कमी थी। इसके अलावा उसने राजधानी के परिवर्तन सहित कई ऐसे प्रयोग किये थे जिससे राज खजाने का बहुत सारा धन खर्च हो चुका था और उसका खजाना लगभग खाली हो चुका था| इस सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए उसने एक कांस्य सिक्का पेश करने का फैसला किया जो चांदी के रूप में समान मूल्य का था। मुहम्मद-बिन-तुगलक ने चांदी और सोने के स्थान पर कांस्य के सिक्कों की पेशकश की लेकिन इस कार्य में कुछ कमियों के कारण इस प्रयोग में भी तुग़लक़ को एक बड़ी विफलता मिली। थोड़े ही समय के भीतर इन सिक्कों के नमूने देश के विभिन्न हिस्सों में पाए गए। नकली सिक्के की एक बड़ी संख्या बाजार में और सरकारी खजाने में प्रवेश कर गयी, सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक घर टकसाल बन गया, और हर घर में जाली सिक्कों को बनाने का कार्य शुरू हो गया| अंत में विफल होकर उसने टोकन मुद्रा वापस लेने का निर्णय लिया।

Muhammad Bin Tughlaq Questions Answers in Hindi

  • मुहम्मद बिन तुगलक का असली नाम क्या था? फखर मलिक
  • मुहम्मद बिन तुगलक के पिता का नाम क्या था? गयासुद्दीन तुग़लक़
  • मुहम्मद बिन तुगलक का जन्म कहाँ हुआ था? 1300 ईस्वी में मुल्तान, पाकिस्तान
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने किस मोरक्कन यात्री को चीन भेजा था? इब्न बतूता (Ibn Battuta)
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से कहाँ बदल ली? दौलताबाद
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने किस धातु में टोकन मुद्रा पेश की थी? कांस्य के सिक्कों
  • 17 साल के लिए मुहम्मद बिन तुगलक के करीबी साथी और सलाहकार कौन थे? जिया-अल-दिन-बरन (Ziya-al-Din-Baran)
  • किस साल में मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हुई थी? 20 मार्च 1351, थट्टा, पाकिस्तान

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