माइटोकॉन्ड्रिया क्या है? माइटोकॉन्ड्रिया की खोज किसने की थी?

माइटोकॉन्ड्रिया यूकेरियोटिक कोशिका के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर, सटीक तंत्रों का उपयोग करके शरीर से सम्बंधित कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं होती हैं, जिसमें विभिन्न प्रोटीन, अणु, और झिल्ली शामिल होते हैं।

इस आर्टिकल में हम माइटोकॉन्ड्रिया क्या है? इसकी परिभाषा, कार्य और संरचना तथा माइटोकांड्रिया की खोज किसने की? के बारे में उल्लेख करेंगे।

माइटोकॉन्ड्रिया क्या है? Mitochondria Kya hai

माइटोकॉन्ड्रिया, जानवरों, पौधों, और कवक की यूकेरियोटिक कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में पाए जाने वाले बहुत महत्वपूर्ण अंग होते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया शरीर के पावर हाउस कहे जाते हैं। ये जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन में संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा से कोशिकाओं के लिए ऊर्जा बनाते हैं।

ये छोटी इकाइयाँ हैं, जो कोशिका के अंदर पाई जाती हैं, और वहां वे कोशिका के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली का उपयोग करके कोशिका झिल्ली से जुड़ते हैं। 

जैसा की हम जानते हैं कि कोशिका कई प्रकार कि होती हैं, अतः कोशिका के प्रकार के आधार पर माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या भिन्न-भिन्न होती है।

इसका एक और कारण यह है कि शरीर में ऐसी कोशिकाएं या ऊतक होते हैं जिनकी ऊर्जा की मांग बहुत अधिक होती है, जैसे कि मांसपेशियां, मस्तिष्क या यकृत, तो इस स्थिति में माइटोकॉन्ड्रिया कि संख्या अधिक होती है और जब ऊर्जा कि मांग कम होती है तो माइटोकॉन्ड्रिया कि संख्या कम होती है।

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माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य

माइटोकॉन्ड्रिया में दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं होती हैं: कोशिकीय श्वसन और रासायनिक ऊर्जा का उत्पादन|

कोशिकीय श्वसन

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं के अंदर के वे छोटे अंग होते हैं जो भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया को कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) के रूप में जाना जाता है।

रासायनिक ऊर्जा का उत्पादन

माइटोकॉन्ड्रिया की सबसे प्रसिद्ध भूमिका कोशिकाओं की ऊर्जा ATP (Adenosine triphosphate) का उत्पादन है। यह एक जटिल और कई चरण में होने वाली प्रक्रिया है जोकि शरीर के समुचित कार्य के लिए आवश्यक होती है।

माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली में कई प्रोटीनों से बने एंजाइम कॉम्प्लेक्स होते हैं, जिनमें कई गतिविधियाँ होती हैं, जैसे कि

  • आणविक ऑक्सीजन का उपयोग
  • विभिन्न कार्बनिक यौगिकों का अपचयन और ऑक्सीकरण|
  • इलेक्ट्रॉन पंपिंग|

कोशिकाओं की मृत्यु में योगदान

कोशिकाओं की मृत्यु जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। जैसे-जैसे कोशिकाएं पुरानी होती जाती हैं, वे कमजोर हो जाती हैं और नष्ट हो जाती हैं। माइटोकॉन्ड्रिया यह तय करने में मदद करते हैं कि कौन सी कोशिकाएं नष्ट हो गई हैं।

इसके अतिरिक्त माइटोकॉन्ड्रिया साइटोक्रोम सी (cytochrome C) छोड़ते हैं, जो कैसपेज़ (caspase) को सक्रिय करता है। कैसपेज़ कोशिकाओं की मृत्यु के दौरान कोशिकाओं को नष्ट करने में शामिल प्रमुख एंजाइमों में से एक होता है।

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माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना

यद्यपि माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना भिन्न-भिन्न हो सकती है, निम्नलिखित भाग हमेशा पाए जाते हैं-

  • बाहरी झिल्ली
  • आंतरिक झिल्ली

बाहरी झिल्ली

माइटोकॉन्ड्रिया बाहर से उनकी बाहरी झिल्ली से बंधे होते हैं, जो एक ही समय में उन्हें एक दूसरे के साथ संवाद करने की अनुमति देता है।

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका से बहुत सारी जानकारी प्राप्त करते हैं, और यही कारण है कि उनके पास छिद्रों के साथ प्रोटीन होते हैं, जिन्हें पोरिन (Porin) कहा जाता है|

आंतरिक झिल्ली

माइटोकॉन्ड्रिया में एक आंतरिक झिल्ली होती है जो मैट्रिक्स बनाती है| यह कोशिका के साइटोप्लाज्म के अनुरूप होता है। यहाँ से ATP के रूप में ऊर्जा प्राप्त होती है। वहां होने वाली प्रमुख उपापचय प्रक्रियाएं हैं:

  • ATP (एटीपी) उत्पादन।
  • क्रेब्स चक्र।
  • अमीनो एसिड का ऑक्सीकरण।
  • फैटी एसिड का ऑक्सीकरण|

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