चांदबीबी का इतिहास । Chand Bibi History in Hindi

चांदबीबी का इतिहास । Chand Bibi history in Hindi

अहमदनगर के सुल्तान की बेटी का नाम चांद बीबी था। वह अपने पिता की इकलौती संतान थी। उस समय दिल्ली पर बादशाह अकबर का राज्य था।

चांद बीबी बहुत कुशल थी और कला में रूचि रखती थी। संगीत में तो वह अति निपुण थी। वीणा पर जब उनके हाथ थिरकते, तो मुग्ध कर देने वाले सुरों को फैला देते थे। उन्हें मराठी, अरबी तथा फारसी आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान था।

Chand Bibi Biography In Hindi –

नाम चांदबीबी
जन्म 1550 ई
पिता हुसैन निजाम शाह प्रथम
माता खुंजा हुमायु
पति अली आदिल शाह प्रथम
मृत्यु 1595
मृत्यु स्थान अहमदनगर से 40 मील दूर

उनका विवाह आदिलशाह से हुआ था, जो बीजापुर के गद्दी पर बैठते थे। चांद बीबी के समान पत्नी पाकर वह अपने को भाग्यशाली समझते थे। चांद बीबी गुणों की खान थी। उनके पति उन्हें बहुत प्यार करते थे। चांद बीबी अपने पति का बहुत सम्मान करती थी, पति भी उनके सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।

पति पत्नी बड़े प्रेम से खुशी से भरा जीवन गुजार रहे थे। वह हमेशा अपने पति की आज्ञा का पालन करती थी। उनकी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती थी।

चांद बीबी शिकार खेलने की शौकीन थी। वह अक्सर अपने पति के साथ शिकार खेलने जाया करती थी। कभी-कभी तो वह अपने पति के साथ युद्ध में जाया करती थी, क्योंकि वह युद्ध कला में भी बहुत होशियार थी। 

एक बार उन पर संकट आन पड़ा। अभी वह युवा ही थी कि इनके पति की मृत्यु हो गई। उस समय तक उनके कोई संतान नहीं हुई थी। अभी उनकी गोद सुनी ही थी।

उनकी कोई संतान तो थी नहीं, अतः अली आदिल शाह ने राजगद्दी का बारिस अपने भाई के बेटे इब्राहिम को बनाया। इस तरह अपने भतीजे को राज गद्दी सौंप दी। इब्राहिम की उम्र छोटी होने के कारण उनका राजकाज चांद बीबी संभालने लगी। वह बड़ी बुद्धिमान और व्यवहार कुशल थी। इसलिए उन्हें राजकाज की बागडोर संभालने में कोई कठिनाई नहीं हुई।

राजकाज चलाने को बड़े-बड़े सरदार अपने रुतबे पर चोट समझने लगे और उनसे जलने लगे। चांद बीबी ने उन सरदारों के नाराज होने की परवाह न करते हुए बहुत समझदारी के साथ राज्य को अच्छे ढंग से चलाया और शांति का राज स्थापित किया।

जब तक इब्राहिम युवा ना हो गए, तब तक उन्होंने राज्य को भली-भांति चलाया, फिर उनके बालिग़ होने पर चांद बीबी ने राजगद्दी उन्हें सौंप दी। उधर उनके पिता का देहांत होने पर वहां का राज्य भी अस्त व्यस्त हो गया था।

वह अपने पिता की एकलौती संतान थी। इस कारण उन्होंने अपने पिता का राज्य को भी अच्छी तरह चलाने के लिए कमर कस ली। अहमदनगर में चारों ओर अशांति फैली थी, परंतु अपनी दूरदर्शिता और इमानदारी से चांद बीबी ने अहमदनगर में भी शांति स्थापित कर दी।

दिल्ली का बादशाह अपने राज्य को बढ़ाने के नशे में चूर था। जब उसकी नजर अहमदनगर पर पड़ी, तो उसे हड़पने की इच्छा से उसने अपने पुत्रों को सेना के साथ वहां भेज दिया। अंधेरे के मंडराते बादल, चांद बीबी ने देखे, तो अपने राज्य की सुरक्षा के लिए उन्होंने कमान संभाल ली।

उन्होंने अपने राज्य की जनता में देशभक्ति की भावना जगाने की कोशिश की। इसके लिए वह पूरे राज्य में घूमती रही उत्साह जगाने की कोशिश करती रही। अंत में लोगों में जोश जगाने में सफल हो गई।

चांद बीबी की सेना में कोई भी कमजोर नहीं था। अकबर की सेना कई महीनों तक किले में घुसने की कोशिश करती रही और घेरा डालकर पड़ी रही, परंतु वह अपने इरादों में सफल नहीं हो सकी।

जब किसी प्रकार वश नहीं चला, तो अकबर की सेना ने किले में कई जगह बारूद लगा दी, जिससे एक स्थान पर किले की दीवार टूट गई और किले में घुसने का रास्ता मिल गया।

उस समय चांद बेबी ने बहादुरी का परिचय दिया। उन्होंने अकबर के सैनिकों का डटकर मुकाबला किया। पुराना किला में घुसने नहीं दिया और साथ ही साथ किले की टूटी हुई दीवार को भी बनवाते रही। अकबर की सेना अपना मनोबल खोने लगी।

जब वह पूरी तरह से निराश हो गई, तो उसने समझौता करना चाहा कि अगर बराबर का क्षेत्र उनको दे दिया जाए, तो वे अपना घेरा उठा लेंगे| परंतु चांदबीबी सहित अहमदनगर के सैनिकों ने उनका यह प्रस्ताव नहीं माना। मुगल बादशाह की विशाल सेना के सामने चांदबीबी जरा भी निराश नहीं हुई। उनका साथ उनके वीर सैनिकों दे रहे थे।

अकबर के पुत्र ने जब देखा चांद बीबी को लड़ाई में हराना बहुत मुश्किल है, तब उन्होंने कूटनीति से काम लिया। एक सैनिक हामिद से बात की और उसे इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह उनकी मुलाकात चांद बीबी से करा देगा।

चांदबीबी अकबर के सैनिकों से मिलना नहीं चाहती थी, लेकिन हामिद के कहने पर वह उससे मिलने को राजी हो गई। वह सैनिक बहुत ही चलाक निकला।

जब उसे अपने लाभ की बात समझ में नहीं आई, तो उसने अपने कटार चांद बीबी की छाती में घुसा दी और उस कटार ने चांद बीबी की लीला समाप्त कर दी। उन्होंने मरते मरते कहा कि या खुदा तेरी मर्जी यही है, मेरा बुलावा आ गया है, मैं अब जा रही हूं, और यह कहकर दम तोड़ दिया।

अकबर के सैनिकों ने उस सैनिक हामिद खां को भी नहीं छोड़ा, उसे भी मार दिया। अपने सेनानायक से गद्दारी करने की सजा उसे भी मिल गई। बिना राजा के राज्य एक अनाथ बच्चे के समान हो जाता है। उस राज्य का अब कोई भी रक्षक नहीं रहा। इसलिए मुगल ने उसे अपने राज्य में मिला लिया।

राज्य तो मुगल बादशाह अकबर ने अपने कब्जे में कर लिया, परंतु चांद बीबी की वीरता की छाप उनके हृदय को भी प्रभावित कर गई थी।

भारत के गौरवशाली इतिहास में सिर्फ पुरुष योद्धाओं के नाम भर दर्ज नहीं हैं, अपितु इसमें कई वीरांगनाओं के नाम भी दर्ज हैं, जिन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नारी शक्ति के शानदार उदाहरण प्रस्तुत किए|

फिर चाहे वह रानी लक्ष्मी बाई और रानी चेनम्मा रही हों, जिन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी, या फिर सरोजनी नायडू और लक्ष्मी सहगल, जिन्होंने देश की आजादी के बाद तक देश की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया|

इसी कड़ी में चांदबीबी एक ऐसा नाम रहीं, जिन्होंने मुगलों की विशाल सेना का मुकाबला करते हुए उसे कड़ी टक्कर दी और दुनिया को नारी शक्ति का दम दिखाया| भारत के वीर बालाओं में चांद बीवी का नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता रहेगा|

चांदबीबी की हत्या किसने की थी?

चांदबीबी की हत्या किसने की थी, इस बारे में इतिहासकारों में मतभेद है।  कुछ विद्वानों के अनुसार उनकी हत्या हामिद खान ने की थी।  वहीँ कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जीता ख़ान ने चाँद बीबी कि हत्या कि थी। जीता खान उन्हीं का का एक एक हिंजड़ा सेवक था। 

चांदबीबी का विवाह किसके साथ हुआ था?

चांदबीबी का विवाह बीजापुर के पाँचवे सुल्तान अली आदिलशाह के साथ हुआ था। 1580 ईसवी में उनके पति कि मृत्यु हो गयी थी|


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