अहमदाबाद मज़दूर आन्दोलन- 1918

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अहमदाबाद मज़दूर आन्दोलन- 1918

Ahmedabad mazdoor andolan 1918 in Hindi-

तत्कालीन भारत में अहमदाबाद एक बहुत बड़ा शहर था और यह एक महत्वपूर्ण व्यापार का केंद्र भी था| अंग्रेजी हुकूमत ने यहां पर कपास उद्योग को बढ़ावा दिया और इसके साथ ही साथ कई अन्य प्रकार के उद्योगों का विकास भी अहमदाबाद में हुआ|
सन 1917 में अहमदाबाद में प्लेग बीमारी फैल गई और स्थानीय सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए| धीरे-धीरे यह बीमारी फैलती गई और श्रमिक वर्ग अहमदाबाद को छोड़कर जाने लगा| श्रमिकों पर जाने से अहमदाबाद में चल रही कई तरह की फैक्ट्रियों के काम पर असर आने लगा| श्रमिकों के पलायन को रोकने के लिए फैक्ट्रियों के मालिकों ने श्रमिकों को “ प्लेग बोनस” देने का वायदा किया| परंतु जब यह बोनस उन तक नहीं पहुंचा तब मिल के मजदूरों ने अनुसूइया साराभाई से संपर्क किया|
1918 के शुरुआती महीनों के दौरान गुजरात के मिल मालिकों और वहां के श्रमिकों के बीच प्लेग बोनस के लिए संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई| श्रमिक मिल मालिकों से 50% की वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे जबकि मिल के मालिक केवल 20% वृद्धि करना चाह रहे थे| इस विवाद को देखते हुए अनसूया बेन साराबाई ने गांधी जी को आमंत्रित किया था।

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Ahmedabad mill strike in Hindi-

1918 में, महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के श्रमिकों और मिल मालिकों के बीच विवाद में हस्तक्षेप किया और उन्होंने श्रमिकों को हड़ताल पर जाने तथा मजदूरी में 35 प्रतिशत की वृद्धि की मांग करने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों को हड़ताल के दौरान मिल के मालिकों के खिलाफ हिंसा का उपयोग ना करने का आह्वान भी किया|
गांधी जी ने श्रमिकों की हड़ताल को बल देने के लिए खुद आमरण अनशन पर बैठ गए| इस आमरण अनशन को देखकर मिल के मालिक चिंतित हुए और उन्होंने 35% की वृद्धि की मांग को स्वीकार कर लिया|


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