मेसोपोटामिया की सभ्यता

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मेसोपोटामिया की सभ्यता

History of Mesopotamia in Hindi-

मेसोपोटामिया की सभ्यता का जन्म इराक की दजला एवं फरात नदियों के मध्य क्षेत्र में हुआ था| इस सभ्यता के दो प्रमुख देवताओं के नाम शमाश एवं अनु थे| मेसोपोटामिया सभ्यता के तीन प्रमुख केंद्र सुमेरिया, बेबीलोनिया और असीरिया थे|

मेसोपोटामिया की सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन निम्न है-

सामाजिक जीवन-

अन्य सभ्यताओं की भांति मेसोपोटामिया का समाज भी तीन वर्गों में विभाजित था- उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग|
उच्च वर्ग में शासक, उच्च अधिकारी, पुरोहित एवं सामंतों का स्थान हुआ करता था| मध्यमवर्ग में किसान, शिल्पकार एवं व्यापारी वर्ग के लोग आते थे जबकि निम्न वर्ग में दास लोगों का स्थान हुआ करता था||

कानूनों का निर्माण एवं उनका संग्रह-

बेबीलोनिया के शासक हम्मूराबी को प्रथम कानून निर्माता की संज्ञा दी गई है| हम्मूराबी ने सर्वप्रथम कानूनों का निर्माण करवाया और इसके साथ ही साथ उसने इन कानूनों का संग्रह भी करवाया था| कानूनों के निर्माण एवं संग्रह को हम्मूराबी की विधि संहिता कहा जाता है| हम्मूराबी की इस विधि संहिता में सभी वर्गों के लोगों के लिए समान अधिकारों की व्यवस्था की गई थी|

लेखन कला और साहित्य का विकास

कृषि एवं व्यापार के अतिरिक्त मेसोपोटामिया की सभ्यता में लेखन एवं साहित्य का विकास सराहनीय है| इस सभ्यता में लेखन कला का आविष्कार विश्व को प्रमुख देन मानी जाती है| इस सभ्यता के लोगों ने जिस लिपि का विकास किया उसे कीलाकार लिपि के नाम से जाना जाता है|

धार्मिक जीवन-

मेसोपोटामिया की सभ्यता (Mesopotamia ki Sabhyata) का धार्मिक जीवन बहुत ही उच्च कोटि का था और इस समाज के लोगों का अनेक देवी देवताओं में विश्वास था| मेसोपोटामिया की सभ्यता के प्रमुख देवता शमाश ( सूर्य देवता), एनलिल (वायु देवता), नन्नार ( चंद्र देवता) , अनु ( आकाश देवता) आदि थे| मेसोपोटामिया के लोग अपने देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पशुओं की बलि चढ़ाते थे| मेसोपोटामिया सभ्यता के अंतर्गत प्रत्येक नगर में एक प्रधान मंदिर हुआ करता था, उस मंदिर का देवता नगर का संरक्षक माना जाता था| इस सभ्यता के लोग अंधविश्वासी होते थे| इस सभ्यता के लोग भूत प्रेत, जादू टोना, ज्योतिष एवं भविष्यवाणियों पर विश्वास रखते थे|
इस सभ्यता में नगर के संरक्षक देवता के लिए नगर में किसी ऊंचे स्थान परंतु के बने चबूतरे पर मंदिर का निर्माण करवाया जाता था इस मंदिर को जिगुरत कहा जाता था|

mesopotamia ki sabhyata

कृषि एवं व्यापार-

मेसोपोटामिया की सभ्यता के लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था कृषि के अतिरिक्त यह लोग पशुपालन का भी कार्य करते थे| इस सभ्यता के लोग धातु, लकड़ी, मिट्टी, हाथी के दांत की कलात्मक वस्तुएं बनाते थे और इन वस्तुओं का व्यापार वह अन्य देशों के साथ करते थे| ऐसा माना जाता है कि यहां के लोगों ने व्यापारिक लेन-देन के लिए नापतोल के बांटो एवं सिक्कों का भी निर्माण किया था|

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विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति

मेसोपोटामिया की सभ्यता के लोगों ने कृषि, व्यापार एवं लेखन कला के अतिरिक्त विज्ञान के क्षेत्र में भी काफी प्रगति की थी| इस सभ्यता के लोगों ने खगोल शास्त्र, ज्योतिष, गणित एवं विज्ञान के क्षेत्र में बहुत अधिक प्रगति की थी|

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